labon se aankh se rukhsaar se kya kya nahin karta | लबों से आँख से रुख़्सार से क्या क्या नहीं करता

  - Parvindar shokh
लबोंसेआँखसेरुख़्सारसेक्याक्यानहींकरता
वोजादूकौनसाहैजोकिवोचेहरानहींकरता
मैंसारेकाग़ज़ोंपेएकमिस्रालिखकेरक्खूँगा
वोजबतककेमेरेशे'रकोपूरानहींकरता
फ़सादोंमेंजोशामिलहैंवोमोहरेहैंसियासतके
ख़ुदअपनेआपकोईभीयहाँदंगानहींकरता
हवाओंमेंनगरकीइसक़दरकुछज़हरफैलाहै
गुलदेतेहैंख़ुशबूपेड़भीसायानहींकरता
जोलिखताहूँवोहोताहैफ़क़ततस्कीनकीख़ातिर
मैंअपनीशाइ'रीकाशहरमेंसौदानहींकरता
मुझेमंज़ूरहैबीमाररहनाउम्र-भरयूँँही
वोजबतकहाथसेछूकरमुझेअच्छानहींकरता
चलोमानाकिअपनीअहमियतहै'शोख़'दौलतकी
ज़मानेमेंमगरहरकामहीपैसानहींकरता
  - Parvindar shokh
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