mushkil hai ki ab shahar men nikle koi ghar se | मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से

  - Parveen Shakir
मुश्किलहैकिअबशहरमेंनिकलेकोईघरसे
दस्तारपेबातगईहोतीहुईसरसे
बरसाभीतोकिसदश्तकेबे-फ़ैज़बदनपर
इकउम्रमिरेखेतथेजिसअब्रकोतरसे
कलरातजोईंधनकेलिएकटकेगिराहै
चिड़ियोंकोबड़ाप्यारथाउसबूढ़ेशजरसे
मेहनतमिरीआंधीसेतोमंसूबनहींथी
रहनाथाकोईरब्तशजरकाभीसमरसे
ख़ुदअपनेसेमिलनेकातोयाराथामुझमें
मैंभीड़मेंगुमहोगईतन्हाईकेडरसे
बे-नाममसाफ़तहीमुक़द्दरहैतोक्याग़म
मंज़िलकातअय्युनकभीहोताहैसफ़रसे
पथरायाहैदिलयूँंकिकोईइस्मपढ़ाजाए
येशहरनिकलतानहींजादूकेअसरसे
निकलेहैंतोरस्तेमेंकहींशामभीहोगी
सूरजभीमगरआएगाइसरहगुज़रसे
  - Parveen Shakir
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