chalne ka hausla nahin rukna muhaal kar diya | चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया इश्क़ के इस सफ़र ने तो मुझ को निढाल कर दिया

  - Parveen Shakir
चलनेकाहौसलानहींरुकनामुहालकरदियाइश्क़केइससफ़रनेतोमुझकोनिढालकरदिया
मिरीगुल-ज़मींतुझेचाहथीइककिताबकी
अहल-ए-किताबनेमगरक्यातिराहालकरदिया
मिलतेहुएदिलोंकेबीचऔरथाफ़ैसलाकोई
उसनेमगरबिछड़तेवक़्तऔरसवालकरदिया
अबकेहवाकेसाथहैदामन-ए-यारमुंतज़िर
बानू-ए-शबकेहाथमेंरखनासँभालकरदिया
मुमकिनाफ़ैसलोंमेंएकहिज्रकाफ़ैसलाभीथा
हमनेतोएकबातकीउसनेकमालकरदिया
मेरेलबोंपेमोहरथीपरमेरेशीशा-रूनेतो
शहरकेशहरकोमिरावाक़िफ़-ए-हालकरदिया
चेहरानामएकसाथआजयादसके
वक़्तनेकिसशबीहकोख़्वाबख़यालकरदिया
मुद्दतोंबा'दउसनेआजमुझसेकोईगिलाकिया
मंसब-ए-दिलबरीपेक्यामुझकोबहालकरदिया
  - Parveen Shakir
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