ab itni saadgi laayein kahaan se | अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ से

  - Parveen Shakir
अबइतनीसादगीलाएँकहाँसे
ज़मींकीख़ैरमाँगेंआसमाँसे
अगरचाहेंतोवोदीवारकरदें
हमेंअबकुछनहींकहनाज़बाँसे
सिताराहीनहींजबसाथदेता
तोकश्तीकामलेक्याबादबाँसे
भटकनेसेमिलेफ़ुर्सततोपूछें
पतामंज़िलकामीर-ए-कारवाँसे
तवज्जोहबर्क़कीहासिलरहीहै
सोहैआज़ादफ़िक्र-ए-आशियाँसे
हवाकोराज़-दाँहमनेबनाया
औरअबनाराज़ख़ुशबूकेबयाँसे
ज़रूरीहोगईहैदिलकीज़ीनत
मकींपहचानेजातेहैंमकाँसे
फ़ना-फ़िल-इश्क़होनाचाहतेथे
मगरफ़ुर्सतथीकार-ए-जहाँसे
वगर्नाफ़स्ल-ए-गुलकीक़द्रक्याथी
बड़ीहिकमतहैवाबस्ताख़िज़ाँसे
किसीनेबातकीथीहँसकेशायद
ज़मानेभरसेहैंहमख़ुदगुमाँसे
मैंइकइकतीरपेख़ुदढालबनती
अगरहोतावोदुश्मनकीकमाँसे
जोसब्ज़ादेखकरख़े
मेंलगाएँ
उन्हेंतकलीफ़क्यूँँपहुँचेख़िज़ाँसे
जोअपनेपेड़जलतेछोड़जाएँ
उन्हेंक्याहक़किरूठेंबाग़बाँसे
  - Parveen Shakir
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