abr-e-rahmat gharo pe rahte the | अब्र-ए-रहमत घरों पे रहते थे

  - Parveen Kaif
अब्र-ए-रहमतघरोंपेरहतेथे
जबदुपट्टेसरोंपेरहतेथे
वोभीपर्दा-दरोंमेंशामिलहैं
पर्देजिनकेदरोंपेरहतेथे
आजकेताजवरहैंजोकलतक
वक़्तकीठोकरोंपेरहतेथे
उनकीकिरचोंसेपावँज़ख़्मीहैं
होंटजोसाग़रोंपेरहतेथे
रक़्सकरतेथेहमभीलेकिनहाँ
मरकज़ोंमहवरोंपेरहतेथे
हमकोरहनापड़ावहाँ'परवीन'
दिलजहाँख़ंजरोंपेरहतेथे
  - Parveen Kaif
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