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Parul Singh "Noor"
zehn men ik dhun sa aake atka ho
zehn men ik dhun sa aake atka ho | ज़ेहन में इक धुन सा आके अटका हो
- Parul Singh "Noor"
ज़ेहन
में
इक
धुन
सा
आके
अटका
हो
जैसे
तेरा
नाम
कोई
नग़मा
हो
रात
में
तुझ
सेे
मिलन
के
वास्ते
चाँद
दिन
भर
छुप
के
सब
से
सजता
हो
सोचती
हूँ
ऐसा
हो
तो
कैसा
हो
हाथ
था
में
सामने
वो
बैठा
हो
क्या
कहें
उसको
क़यामत
या
क़ज़ा
इश्क़
जब
दोनों
तरफ़
इक
तरफा
हो
पूछती
है
दूर
घर
से
माँ
मुझे
दोस्त
है
कोई
जो
लगता
अपना
हो
हिज्र
का
अफ़सोस
इतना
सा
उसे
हाथ
मेरे
कोई
कंगन
चटका
हो
- Parul Singh "Noor"
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उम्र
भर
मेरी
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
जो
सबब
मेरी
ख़मोशी
के
लिए
काफ़ी
है
जान
दे
देंगे
अगर
आप
कहेंगे
हम
सेे
जान
देना
ही
मु'आफ़ी
के
लिए
काफ़ी
है
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Aakash Giri
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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उसको
चाहा
और
चाहत
पर
क़ायम
हैं
पर
अफ़सोस
के
हम
इज़हार
नहीं
कर
सकते
Shadab Asghar
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दूसरा
मौक़ा
तो
ख़ुद
को
भी
नहीं
देते
हम
और
वो
रोते
हुए
कह
रही
सॉरी
बाबू
Rachit Sonkar
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अफ़सोस
हो
रहा
है
तेरी
शक्ल
देख
कर
क्या
कोई
तेरा
चाहने
वाला
नहीं
रहा
Abbas Tabish
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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उम्र
भर
साँप
से
शर्मिंदा
रहे
ये
सुन
कर
जब
से
इंसान
को
काटा
है
तो
फन
दुखता
है
Munawwar Rana
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वो
सर
भी
काट
देता
तो
होता
न
कुछ
मलाल
अफ़्सोस
ये
है
उस
ने
मेरी
बात
काट
दी
Tahir Faraz
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तमाम
होश
ज़ब्त
इल्म
मस्लहत
के
बाद
भी
फिर
इक
ख़ता
मैं
कर
गया
था
माज़रत
के
बाद
भी
Pallav Mishra
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फ़ातिहा
पढ़
कि
फूल
रख
मुझ
पर
आ
गया
है
तो
कुछ
जता
अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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हर
दम
नज़र
के
सामने
रक्खे
हैं
मैंने
दोस्त
ख़ंजर
निकाल
ले
ना
कहीं
पीठ
करते
ही
Parul Singh "Noor"
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जो
सारे
ज़ख़्म
मेरे
भर
दिया
करता
उसी
के
नाम
का
ख़ंजर
बनाया
है
Parul Singh "Noor"
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वो
बोला
मुलाक़ात
ख़्वाबों
में
होगी
मगर
आँख
कमबख़्त
लगती
नहीं
है
Parul Singh "Noor"
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पता
तो
तब
चला
जब
मुझ
पे
आया
सब
बड़ा
दम
होता
है
बाबा
के
काँधे
में
Parul Singh "Noor"
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थी
इक
वक़्त
अब
शा'इरी
बस
बची
है
यक़ीं
करना
मुझ
में
मुहब्बत
नहीं
है
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Parul Singh "Noor"
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