zamaane ho ga.e umeed-waar hain ham log | ज़माने हो गए उमीद-वार हैं हम लोग

  - Parmod Lal Yakta
ज़मानेहोगएउमीद-वारहैंहमलोग
सितम-कशान-ए-ग़म-ए-रोज़गारहैंहमलोग
जुनूनकामआयाकिसारेख़्वाब-ओ-ख़याल
उलझकेरहगएजिनसेवोख़ारहैंहमलोग
जिसेतजस्सुस-ए-सब्र-ए-गुरेज़-पाकहिए
इसीख़लिशइसीग़मकाशिकारहैंहमलोग
शराब-ए-तजरबा-ए-तल्ख़पीचुकेहैंहम
सँभलगएहैंबहुतहोशियारहैंहमलोग
जानेकबकहाँलेजाएकबकहाँरुकजाए
येरख़्श-ए-उम्रकिजिसपरसवारहैंहमलोग
क़समतसलसुल-ए-लैल-ओ-नहारकी'यकता'
सितम-कशान-ए-ग़म-ए-इंतिज़ारहैंहमलोग
  - Parmod Lal Yakta
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