duniya-e-husn-o-ishq ka ulta hisaab hai | दुनिया-ए-हुस्न-ओ-इश्क़ का उल्टा हिसाब है

  - Parmod Lal Yakta
दुनिया-ए-हुस्न-ओ-इश्क़काउल्टाहिसाबहै
ना-कामयाबहैजोयहाँकामयाबहै
अहल-ए-वफ़ापेरोज़-ए-अज़लसेइताबहै
दुनियाख़राबहैज़मानाख़राबहै
रू-ए-हसींपेउनकेजलाल-ओ-जमालकी
इकऔरहैनक़ाबजोज़ेर-ए-नक़ाबहै
इतनीभीदूररहनेकीकोशिशकीजिए
इसइज्तिनाबकातोमोहब्बतजवाबहै
जिसकेवरक़वरक़पेहैतफ़्सीर-ए-काएनात
येज़िंदगीइकऐसीमुकम्मलकिताबहै
अबदिलमेंयाद-ए-माज़ी-ए-मरहूमभीनहीं
कितनाहसींफ़रेबनयाइंक़लाबहै
'यकता'ग़ज़लमेंजज़्बा-ए-बेदारचाहिए
इंसानकाज़मीरअभीमहव-ए-ख़्वाबहै
  - Parmod Lal Yakta
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