itni si aankh ne gham kitna utha liya hai | इतनी सी आँख ने ग़म कितना उठा लिया है

  - Paras Mazari
इतनीसीआँखनेग़मकितनाउठालियाहै
कश्तीनेअपनेअंदरदरियाउठालियाहै
उसनीम-वस्लसेयेतर्क-ए-तअ'ल्लुक़अच्छा
चाँदीकोरखकेमैंनेसोनाउठालियाहै
इकतोपगारजैसेबच्चोंकीजेब-ख़र्ची
ऊपरसेदोस्तोंकाख़र्चाउठालियाहै
ख़ुश्बूकेआशिक़ोंकोतज़ईन-ए-बाग़सेक्या
जोफूलभीज़रासामहकाउठालियाहै
चुभजाएसोईभीतोभागेंमुझेदिखाने
जैसेकिमैंनेसबकाठेकाउठालियाहै
नानीनेतर्ककरदीक्यूँँरस्म-ए-क़िस्सा-गोई
क्याचाँदसेकिसीनेचर्ख़ाउठालियाहै
  - Paras Mazari
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