bheenee bheenee dard ki KHushboo lutaane ke li.e | भीनी भीनी दर्द की ख़ुशबू लुटाने के लिए

  - Pankaj Sarhadi
भीनीभीनीदर्दकीख़ुशबूलुटानेकेलिए
फूलखिलतेहैंचमनमेंमुस्कुरानेकेलिए
हरगुल-ए-तहज़ीबकोहक़हैकिवोखिलतारहे
इसरियाज़-ए-दहरमेंख़ुशबूलुटानेकेलिए
यूँँसिमटनाभीहैकोईज़िंदगीदोस्तो
ज़िंदगीहैवुसअ'त-ए-आलमपेछानेकेलिए
कुछफ़रेब-ए-रंग-ओ-बूमेंहीजाताहैबशर
वर्नायेदुनियानहींहैदिललगानेकेलिए
एकजोगननेबहाकरज्ञानकीगंगाकहा
ज्ञानहीकैलाशहैशंकरकोपानेकेलिए
दोस्तीमेंहैबजा'पंकज'सवाल-ए-शौक़भी
होतीहैयारीमगरक़ुर्बानजानेकेलिए
  - Pankaj Sarhadi
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