dil men agar na ishq-o-mohabbat ki chaah ho | दिल में अगर न इश्क़-ओ-मोहब्बत की चाह हो

  - Pandit Jagmohan Nath Raina Shauq
दिलमेंअगरइश्क़-ओ-मोहब्बतकीचाहहो
नालादर्दहोफ़ुग़ाँहोआहहो
रुस्वाए'तिबार-ए-तग़ाफ़ुलकोकीजिए
क्याफ़ाएदाकिपुर्सिश-ए-दिलगाहगाहहो
दुश्मनसेपूछताहूँनिशान-ए-हरीम-ए-नाज़
मेरीतरहसेकोईगुम-कर्दा-राहहो
राह-ए-जुनूँमेंमुझकोकिसीसेनहींहैकाम
बसमैंहूँऔरइकदिल-ए-शोरिश-पनाहहो
करअबतूफ़िक्रहुस्न-ए-अमलकूचहैक़रीब
रस्ताकठिनहैसाथमेंकुछज़ाद-ए-राहहो
तौहीन-ए-शानअफ़्वहैइस्याँसेइज्तिनाब
या'नीगुनाहगारहैजोबे-गुनाहहो
दुनियामेंऐसेलोगोंसेपालापड़े'शौक़'
ज़ाहिरहोजिनकासाफ़तोबातिनसियाहहो
  - Pandit Jagmohan Nath Raina Shauq
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