vahshat-e-dil ne kahii ka bhi na rakha mujh ko | वहशत-ए-दिल ने कहीं का भी न रक्खा मुझ को

  - Pandit Jagmohan Nath Raina Shauq
वहशत-ए-दिलनेकहींकाभीरक्खामुझको
देखनाहैअभीक्याकहतीहैदुनियामुझको
असर-ए-क़ैद-ए-तअ'य्युनसेभीआज़ादहैदिल
किसतरहबंद-ए-अलाएक़होगवारामुझको
लेनेभीदेअभीमौजलब-ए-साहिलकेमज़े
क्यूँँडुबोतीहैउभरनेकीतमन्नामुझको
ख़्वाहिश-ए-दिलथीकिमिलताकहींसौदा-ए-जुनूँ
मैंनेक्यामाँगाथाक़िस्मतनेदियाक्यामुझको
तेरीबे-पर्दगी-ए-हुस्ननेआँखेंखोलीं
तंग-दामानी-ए-नज़्ज़ाराथीपर्दामुझको
आख़िरीदौरमेंमदहोशहुआथालेकिन
लग़्ज़िश-ए-पानेमिरीख़ूबसँभालामुझको
उम्रसारीतोकटीदैर-ओ-हरममें'शौक़'
इसपेसज्दाभीतोकरनानहींआयामुझको
  - Pandit Jagmohan Nath Raina Shauq
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