fazaa men karb ka ehsaas gholti hui raat | फ़ज़ा में कर्ब का एहसास घोलती हुई रात

  - P P Srivastava Rind
फ़ज़ामेंकर्बकाएहसासघोलतीहुईरात
हवसकीखिड़कियाँदरवाज़ेखोलतीहुईरात
अजीबरिश्तेबनातीहैतोड़देतीहै
नईरुतोंकेसफ़ीरोंसेबोलतीहुईरात
येधड़कनोंकेअंधेरेयेज़ख़्मज़ख़्मचराग़
किवाड़ख़ालीमकानोंकेखोलतीहुईरात
अथाहगहराअँधेराग़ज़बकासन्नाटा
फ़ज़ामेंदर्दकातेज़ाबघोलतीहुईरात
किधरसेआतीहैआवाराख़ुशबुओंकीतरह
बरहनाजिस्मकेसाएटटोलतीहुईरात
रतजगोंकेहैंचर्चेकोईग़मकाअलाव
सँभलकेआएज़राघरमेंडोलतीहुईरात
कहाँसेलाएँगेसब्र-ओ-सुकूनकेलम्हे
किमेरेघरमेंहैकोहरामतौलतीहुईरात
हमारेसाथहैतन्हाइयोंकीभीड़में'रिंद'
किसीकेलम्सकीख़ैरातरोलतीहुईरात
  - P P Srivastava Rind
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy