मुसाफ़िरतमिरीहरजुस्तुजूसेख़ालीहै
बसइकमदारमेंफिरनेकीख़ूबनालीहै
तमामवक़्तमैंशहर-ए-गुमाँमेंरहताहूँ
सुकूँसेरहनेकीमंतिक़नईनिकालीहै
हरीसआरियोंकीभेंटचढ़गयाचुप-चाप
शजरपेअबकोईपत्तानकोईडालीहै
हवामेंभरगईहैबू-ए-इश्तिहाहरसू
किसीग़रीबनेअपनीरिदाउछालीहै
लबोंपेचाशनीऔरदिलमेंनफ़रतोंकाज़हर
येआब-ओ-नारकीसंगतबड़ीनिरालीहै
बतारहाहैयेपत्तोंकामातमीसाशोर
चमनसेजल्दहीआँधीगुज़रनेवालीहै