ghar ke andar bholi-bhaali sooraten achchhii lagin | घर के अंदर भोली-भाली सूरतें अच्छी लगीं

  - Obaidur Rahman
घरकेअंदरभोली-भालीसूरतेंअच्छीलगीं
मुस्कुरातीगुलखिलातीरौनक़ेंअच्छीलगीं
जबसिसकतीरेंगतीसीज़िंदगीदेखीकहीं
फिरख़ुदाकीदीहुईसबनेमतेंअच्छीलगीं
एकदिलसेदूसरेदिलतकसफ़रकरतेरहे
रहगुज़ार-ए-शौक़मेंयेहिजरतेंअच्छीलगीं
धूपकेलम्बेसफ़रसेलौटकेआएजोघर
बंदकमरेमेंसुकूँकीसाअतेंअच्छीलगीं
दिलकीदुनियाहसरतोंकेदमसेहीआबादहै
गाहेगाहेहमकोअपनीहसरतेंअच्छीलगीं
जिनघरोंमेंअज़्मत-ए-रफ़्ताकेरौशनथेचराग़
उनकेबाम-ओ-दरहमेंउनकीछतेंअच्छीलगीं
ऐबअपनेचेहरेकाकिसकोनज़रआया'उबैद'
आइनेमेंसबकोअपनीसूरतेंअच्छीलगीं
  - Obaidur Rahman
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