kabhi kabhi ye soona-pan khal jaata hai | कभी कभी ये सूना-पन खल जाता है

  - Obaid Siddiqi
कभीकभीयेसूना-पनखलजाताहै
बसइकलम्हाआताहैटलजाताहै
तुझसेमुझकोबैरसहीपरकभीकभी
दुनियातेराजादूभीचलजाताहै
जानलियाहैलेकिनमाननाबाक़ीहै
तूसायाहैऔरसायाढलजाताहै
इकदिनमैंअश्कोंमेंयूँँघुलजाऊँगा
जैसेकाग़ज़बारिशमेंगलजाताहै
किसकेक़ब्ज़ेमेंहैख़ज़ानाउजालोंका
कौनज़मींपरतारीकीमलजाताहै
इसकोतेरीयादकहूँयाअपनीयाद
शामसेपहलेएकदियाजलजाताहै
  - Obaid Siddiqi
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