dayaar-e-khwaab se aage safar karne ka din hai | दयार-ए-ख़्वाब से आगे सफ़र करने का दिन है

  - Obaid Siddiqi
दयार-ए-ख़्वाबसेआगेसफ़रकरनेकादिनहै
तोक्यायेक़िस्सा-ए-जाँमुख़्तसरकरनेकादिनहै
बुलावागयाहैफिरमुझेसहरा-नवर्दीका
यहीतोज़िंदगीकोहम-सफ़रकरनेकादिनहै
मुझेरक़्स-ए-जुनूँकरनापड़ेगाशामहोनेतक
मुदारात-ए-हुजूम-ए-दीदा-तरकरनेकादिनहै
ख़िज़ाँकीबद-हवासेीउसकेचेहरेसेहैज़ाहिर
जहाँकोमौसम-ए-गुलकीख़बरकरनेकादिनहै
येख़ाशाक-ए-समाअतख़ाकहोनाचाहतेहैं
ज़बाँकोआजअपनीशोला-गरकरनेकादिनहै
हुआहैदीदनीमंज़रज़मींसेआसमाँका
क़फ़समेंआरज़ू-ए-बाल-ओ-परकरनेकादिनहै
  - Obaid Siddiqi
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