उभरतीडूबतीसाँसोंकासिलसिलाक्यूँँहै
कभीयेसोचकिजोकुछहुआहुआक्यूँँहै
बनेहैंएकहीमिट्टीसेहमसभीलेकिन
हमारीसोचमेंइसदर्जाफ़ासलाक्यूँँहै
लगारखाहैयेकिसनेकड़ीकोअंदरसे
उजाड़घरकादरीचाडराडराक्यूँँहै
अभीतोफूलभीआएनहींहैंशाख़ोंपर
अभीसेबोझदरख़्तोंपेपड़रहाक्यूँँहै
ठहरगयाहैवोआकरअनाकेनुक़्तेपर
उसीकेसाथमिरावक़्तरुकगयाक्यूँँहै
तुम्हींनेसोचकेबिच्छूलगाकेरक्खेथे
नहींतोज़ख़्मतुम्हाराहरा-भराक्यूँँहै
समझरहाहैकितेरीकोईसुनेगानहीं
तूअपनेजिस्मकीचीख़ोंसेबोलताक्यूँँहै