dilon ke zakham bharte kyun nahin hain | दिलों के ज़ख़्म भरते क्यूँँ नहीं हैं

  - Obaid Haris
दिलोंकेज़ख़्मभरतेक्यूँँनहींहैं
हमइसपरग़ौरकरतेक्यूँँनहींहैं
दग़ादेकरनिकलजातीहैआगे
ख़ुशीसेलोगडरतेक्यूँँनहींहैं
तिजारतक्यूँँअधूरीहैहमारी
हमारेनापभरतेक्यूँँनहींहैं
किसीनेभीपूछादुश्मनोंसे
मोहब्बतआपकरतेक्यूँँनहींहैं
हमारीज़िंदगीहैमौतजैसी
यहीसचहैतोमरतेक्यूँँनहींहैं
नज़रऔरोंपेक्यूँँरहतीहै'हारिस'
हमअपनाकामकरतेक्यूँँनहींहैं
  - Obaid Haris
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