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Nit
mohabbat hai kahaan dil ka batao mel jaani
mohabbat hai kahaan dil ka batao mel jaani | मोहब्बत है कहाँ दिल का बताओ मेल जानी
- Nit
मोहब्बत
है
कहाँ
दिल
का
बताओ
मेल
जानी
मोहब्बत
तो
हुई
है
जिस्म
का
अब
खेल
जानी
- Nit
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तुमने
कैसे
उसके
जिस्म
की
ख़ुशबू
से
इनकार
किया
उस
पर
पानी
फेंक
के
देखो
कच्ची
मिट्टी
जैसा
है
Tehzeeb Hafi
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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हुस्न
जब
मेहरबाँ
हो
तो
क्या
कीजिए
इश्क़
के
मग़्फ़िरत
की
दु'आ
कीजिए
Khumar Barabankvi
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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जब
से
तूने
ये
बोला
था
"बदन
का
क्या
है
मिट्टी
है"
तब
से
तेरी
पीठ
पे
मुझको
हरसिंगार
उगाने
थे
Siddharth Saaz
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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इसीलिए
तो
हिफ़ाज़त
में
बैठा
रहता
हूँ
मेरे
बदन
में
कोई
नीम
जान
रहता
है
Nirmal Nadeem
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जला
है
जिस्म
जहाँ
दिल
भी
जल
गया
होगा
कुरेदते
हो
जो
अब
राख
जुस्तजू
क्या
है
Mirza Ghalib
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अब
सुलगती
है
हथेली
तो
ख़याल
आता
है
वो
बदन
सिर्फ़
निहारा
भी
तो
जा
सकता
था
Ameer Imam
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न
जाने
वो
कैसे
हमदम
होंगे
मर्ज़
भी
और
वो
ही
मरहम
होंगे
Nit
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जैसा
था
वैसा
नइँ
है
'नित'
पहले
जैसा
नइँ
है
Nit
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वो
मुलाक़ात
आख़िरी
थी
तुम
सेे
वो
बात
आख़िरी
थी
Nit
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ख़ुदाई
न
करना
दुहाई
न
करना
हमारे
लिए
अब
सफ़ाई
न
करना
जो
तुमने
किया
है
वो
सब
जानता
हूँ
क़सम
खा
के
भी
बे-वफ़ाई
न
करना
सुलगते
हैं
अब
तक
वो
लम्हे
हमारे
इन
आँखों
में
झूटी
नुमाई
न
करना
अगर
फिर
से
मिलना
हो
तक़दीर
में
भी
तबीअत
से
आना
रिवाई
न
करना
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पहले
तो
होने
का
डर
फिर
तुझको
खोने
का
डर
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