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NISHKARSH AGGARWAL
na jaane kaunsa mere KHuda kab kaam aa jaa.e
na jaane kaunsa mere KHuda kab kaam aa jaa.e | न जाने कौन सा मेरे ख़ुदा कब काम आ जाए
- NISHKARSH AGGARWAL
न
जाने
कौन
सा
मेरे
ख़ुदा
कब
काम
आ
जाए
ख़ुदा
दो
चार
बस
हम
इसलिए
भी
साथ
रखते
हैं
- NISHKARSH AGGARWAL
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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अँधेरों
में
भले
ही
साथ
छोड़ा
था
हमारा
मगर
जब
रौशनी
लौटी
तो
साए
लौट
आए
Vikas Sahaj
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फिरता
है
कैसे-कैसे
सवालों
के
साथ
वो
उस
आदमी
की
जामातलाशी
तो
लीजिए
Dushyant Kumar
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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किसी
ने
ख़्वाब
में
आकर
मुझे
ये
हुक्म
दिया
तुम
अपने
अश्क
भी
भेजा
करो
दु'आओं
के
साथ
Afzal Khan
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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हमेशा
यही
भूल
करता
रहा
तेरा
साथ
पाने
को
मरता
रहा
सुनहरे
बहारों
के
मौसम
तले
गुलिस्ताँ
हमारा
बिखरता
रहा
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Ambar
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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इन
दीवारों
की
भी
आँखें
आ
जाती
हैं
मेरे
पहलू
से
जब
यादें
आ
जाती
हैं
सँभलने
लगता
हूँ
जब
भी
मैं
यारों
तब
दिन
को
धमका
के
ये
रातें
आ
जाती
हैं
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NISHKARSH AGGARWAL
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जिस
तरह
याद
आते
हो
तुम
उस
तरह
आ
भी
जाया
करो
NISHKARSH AGGARWAL
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गर
रो
रहा
हूँ
मैं
तो
कमज़ोर
मत
समझना
ये
रोना
है
बनाता
मज़बूत
यार
मुझको
NISHKARSH AGGARWAL
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ग़म-ज़दा
रहने
वो
नहीं
देता
ख़ुश
यूँँ
मुझ
सेे
रहा
नहीं
जाता
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जब
परेशाँ
होता
हूँ
इस
ज़िंदगी
की
धूप
से
करता
हूँ
साया
किताबों
का
मैं
बच्चों
की
तरह
NISHKARSH AGGARWAL
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