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NISHKARSH AGGARWAL
maara hai gham ne is qadar
maara hai gham ne is qadar | मारा है ग़म ने इस क़दर
- NISHKARSH AGGARWAL
मारा
है
ग़म
ने
इस
क़दर
रोए
ख़ुशी
ये
देख
कर
दिल
धड़के
है
जोरों
से
क्यूँँ
जब
देखें
वो
यूँं
इक
नज़र
ढूढों
किधर
वो
है
गया
आँगन
में
था
जो
इक
शजर
देखा
तो
इन
आँखों
ने
था
फिर
क्यूँँ
हुआ
दिल
पे
असर?
सब
कुछ
गुज़र
जाता
है
तो
माज़ी
मिरे
तू
भी
गुज़र
खोया
रहा
मैं
इस
कदर
ढूंढें
मुझे
मेरा
ही
घर
मंजिल
सभी
की
मौत
है
है
ज़िन्दगी
बस
इक
सफ़र
- NISHKARSH AGGARWAL
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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न
जाने
कैसी
महक
आ
रही
है
बस्ती
से
वही
जो
दूध
उबलने
के
बाद
आती
है
Munawwar Rana
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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मेरे
होंठों
के
सब्र
से
पूछो
उसके
हाथों
से
गाल
तक
का
सफ़र
Mehshar Afridi
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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तेरी
इन
यादों
की
धीमी
आँच
पे,
रोज़
जलता
है
सनम
ये
दिल
मिरा
NISHKARSH AGGARWAL
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अब
वो
भी
देखे
मेरे
ही
इंतिज़ार
को
बस
सो
उसके
दर
पे
रख
आया
मैं
ये
आँखें
अपनी
NISHKARSH AGGARWAL
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वो
कह
रहें
हैं
सब
सहीं
है
देख
तो
मैं
कह
रहा
हूँ
देख
मुझ
को
छोड़
कर
NISHKARSH AGGARWAL
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ख़ामोशी
वो
भी
इतनी
मेरे
उसके
दरमियाँ
इस
दिल
के
टूटने
की
सदा
आ
गई
उसे
NISHKARSH AGGARWAL
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ग़म-ज़दा
रहने
वो
नहीं
देता
ख़ुश
यूँँ
मुझ
सेे
रहा
नहीं
जाता
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