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NISHKARSH AGGARWAL
KHud ko sab ki nazar se bachaaya karo
KHud ko sab ki nazar se bachaaya karo | ख़ुद को सब की नज़र से बचाया करो
- NISHKARSH AGGARWAL
ख़ुद
को
सब
की
नज़र
से
बचाया
करो
मेरी
ग़ज़लें
न
तुम
गुनगुनाया
करो
दिल
में
जो
है
तुम्हारे
वो
कह
दो
उसे
है
मोहब्बत
अगर
तो
जताया
करो
चाँद
आता
है
यूँँ
जिस
तरह
रात
को
तुम
भी
चोरी
छिपे
छत
पे
आया
करो
मैं
मिला
था
तुम्हें
यार
इस
बात
का
तुम
कोई
तो
निशाँ
छोड़
जाया
करो
- NISHKARSH AGGARWAL
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ख़ैरात
में
अब
दे
दिया
जाए
इसे
हर
रात
नीदें
ज़ाया'
होती
रहती
हैं
Nishant Singh
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कब
ठहरेगा
दर्द
ऐ
दिल
कब
रात
बसर
होगी
सुनते
थे
वो
आएँगे
सुनते
थे
सहर
होगी
Faiz Ahmad Faiz
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उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
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Paplu Lucknawi
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फेंक
कर
रात
को
दीवार
पे
मारे
होते
मेरे
हाथों
में
अगर
चाँद
सितारे
होते
Unknown
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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जिस
पर
हमारी
आँख
ने
मोती
बिछाए
रात
भर
भेजा
वही
काग़ज़
उसे
हम
ने
लिखा
कुछ
भी
नहीं
Bashir Badr
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
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न
जाने
कौन
सा
मेरे
ख़ुदा
कब
काम
आ
जाए
ख़ुदा
दो
चार
बस
हम
इसलिए
भी
साथ
रखते
हैं
NISHKARSH AGGARWAL
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कल
छत
पे
तुझे
देख
सनम
चाँद
यूँँ
बोला
ये
किसने
बनाया
ज़मीं
पे
चेहरा
हमारा
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गर
रो
रहा
हूँ
मैं
तो
कमज़ोर
मत
समझना
ये
रोना
है
बनाता
मज़बूत
यार
मुझको
NISHKARSH AGGARWAL
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पहले
रोता
था
तो
सो
जाता
था
अब
जो
रोता
हूँ
तो
बस
रोता
हूँ
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इक
ग़म
जब
तैयार
हुआ
है
जाने
को
दूजा
ग़म
बेताब
हुआ
तब
आने
को
उसने
माँगा
है
तोहफ़े
में
इक
तारा
मैं
पैदल
हूँ
निकला
तारा
लाने
को
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