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Nikunj Rana
tumne keval ye mohabbat dekhi hai
tumne keval ye mohabbat dekhi hai | तुमने केवल ये मोहब्बत देखी है
- Nikunj Rana
तुमने
केवल
ये
मोहब्बत
देखी
है
हमने
तो
करके
हक़ीक़त
देखी
है
चीज़ें
जो
थीं
आज़मा
सब
ली
गईं
लगने
वाली
हमने
आदत
देखी
है
देखा
तुमको
जब
भी
पाया
हमने
है
चलती
फिरती
हमने
आफ़त
देखी
है
ये
लुभाना
ये
दिखावा
ठीक
है
क्या
कभी
तुमने
नज़ाकत
देखी
है
पूछते
हो
हर
किसी
का
हाल
तुम
तुमने
क्या
अपनी
भी
हालत
देखी
है
- Nikunj Rana
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तुम
मिरी
ज़िंदगी
हो
ये
सच
है
ज़िंदगी
का
मगर
भरोसा
क्या
Bashir Badr
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तुम
मिरे
साथ
हो
ये
सच
तो
नहीं
है
लेकिन
मैं
अगर
झूट
न
बोलूँ
तो
अकेला
हो
जाऊँ
Ahmad Kamal Parvazi
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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कुछ
तो
मिल
जाए
लब-ए-शीरीं
से
ज़हर
खाने
की
इजाज़त
ही
सही
Arzoo Lakhnavi
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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सच
कहें
तो
वो
कहानी
बीच
में
दम
तोड़
देगी
जिस
कहानी
को
सभी
किरदार
छोड़े
जा
रहे
हैं
Anurag Pandey
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मुझे
आज़ाद
कर
दो
एक
दिन
सब
सच
बता
कर
तुम्हारे
और
उसके
दरमियाँ
क्या
चल
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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उनकी
नज़रों
से
हमें
थी
देखनी
जन्नत
कई
पर
वो
बिछड़े
यूँँ
कि
बस
सारे
नज़ारे
खो
गए
Nikunj Rana
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हमने
देखी
गुलाब
सी
सूरत
कैसी
कैसी
गुलाब
सी
सूरत
इक
नज़र
देख
ही
नहीं
पाए
याद
आई
गुलाब
सी
सूरत
पूछते
हो
की
ज़िंदगी
क्या
हैं
मुस्कुराती
गुलाब
सी
सूरत
तंग
रहता
हैं
जब
से
आईना
क्यूँ
सजी
थी
गुलाब
सी
सूरत
हमने
फिर
से
हथेली
फैलाई
जब
भी
बिखरी
गुलाब
सी
सूरत
अब
भी
मासूमियत
पे
मरते
हो
हैं
तबाही
गुलाब
सी
सूरत
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Nikunj Rana
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सालों
की
मोहब्बत
अब
किस
के
नाम
की
जाए
क्यूँँ
ये
ज़िंदगी
अपनी
यूँँ
तमाम
की
जाए
Nikunj Rana
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हमें
भी
कर
दे
इस
ज़िद
से
रिहा
तू
ज़रा
मिल
कर
दे
बस
ख़ुद
से
जुदा
तू
Nikunj Rana
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शाख
से
टूट
कर
काँटों
पे
आएँगे
हम
हैं
वो
फूल
कुचले
नहीं
जाएँगे
Nikunj Rana
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