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Nida Fazli
kacche bakhiye ki tarah rishte udhad jaate hain
kacche bakhiye ki tarah rishte udhad jaate hain | कच्चे बख़िये की तरह रिश्ते उधड़ जाते हैं
- Nida Fazli
कच्चे
बख़िये
की
तरह
रिश्ते
उधड़
जाते
हैं
लोग
मिलते
हैं
मगर
मिल
के
बिछड़
जाते
हैं
यूँँ
हुआ
दूरियाँ
कम
करने
लगे
थे
दोनों
रोज़
चलने
से
तो
रस्ते
भी
उखड़
जाते
हैं
छाँव
में
रख
के
ही
पूजा
करो
ये
मोम
के
बुत
धूप
में
अच्छे
भले
नक़्श
बिगड़
जाते
हैं
भीड़
से
कट
के
न
बैठा
करो
तन्हाई
में
बे-ख़याली
में
कई
शहर
उजड़
जाते
हैं
- Nida Fazli
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मोहब्बत
एक
ख़ुशबू
है
हमेशा
साथ
चलती
है
कोई
इंसान
तन्हाई
में
भी
तन्हा
नहीं
रहता
Bashir Badr
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कुछ
लोग
ख़यालों
से
चले
जाएँ
तो
सोएँ
बीते
हुए
दिन
रात
न
याद
आएँ
तो
सोएँ
Habib Jalib
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ये
लोग
कौन
हैं
आख़िर
कहाँ
से
आते
हैं
जो
जिस्म
नोच
के
फिर
बेटियाँ
जलाते
हैं
Shajar Abbas
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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कान्हा
होंगे
लोग
वहाँ
के
राधा
होंगी
बालाएँ
प्यार
की
बंसी
बजती
होगी
हर
समय
हर
ठाओं
रे
Ghaus Siwani
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कुछ
लोग
हैं
जो
झेल
रहे
हैं
मुसीबतें
कुछ
लोग
हैं
जो
वक़्त
से
पहले
बदल
गए
Shakeel Jamali
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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हम
तो
सुनते
थे
कि
मिल
जाते
हैं
बिछड़े
हुए
लोग
तू
जो
बिछड़ा
है
तो
क्या
वक़्त
ने
गर्दिश
नहीं
की
Ambreen Haseeb Ambar
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वो
लोग
हम
ही
थे
मुहब्बत
में
जो
फिर
आगे
हुए
वो
लोग
हम
ही
थे
मियाँ
जो
दूर
भागे
जिस्म
से
Kartik tripathi
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दिन
सलीक़े
से
उगा
रात
ठिकाने
से
रही
दोस्ती
अपनी
भी
कुछ
रोज़
ज़माने
से
रही
चंद
लम्हों
को
ही
बनती
हैं
मुसव्विर
आँखें
ज़िंदगी
रोज़
तो
तस्वीर
बनाने
से
रही
इस
अँधेरे
में
तो
ठोकर
ही
उजाला
देगी
रात
जंगल
में
कोई
शम्अ
जलाने
से
रही
फ़ासला
चाँद
बना
देता
है
हर
पत्थर
को
दूर
की
रौशनी
नज़दीक
तो
आने
से
रही
शहर
में
सब
को
कहाँ
मिलती
है
रोने
की
जगह
अपनी
इज़्ज़त
भी
यहाँ
हँसने
हँसाने
से
रही
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Nida Fazli
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सफ़र
में
धूप
तो
होगी
जो
चल
सको
तो
चलो
सभी
हैं
भीड़
में
तुम
भी
निकल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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कभी
किसी
को
मुकम्मल
जहाँ
नहीं
मिलता
कहीं
ज़मीन
कहीं
आसमाँ
नहीं
मिलता
Nida Fazli
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होश
वालों
को
ख़बर
क्या
बे-ख़ुदी
क्या
चीज़
है
इश्क़
कीजे
फिर
समझिए
ज़िंदगी
क्या
चीज़
है
उन
से
नज़रें
क्या
मिलीं
रौशन
फ़ज़ाएँ
हो
गईं
आज
जाना
प्यार
की
जादूगरी
क्या
चीज़
है
बिखरी
ज़ुल्फ़ों
ने
सिखाई
मौसमों
को
शाइ'री
झुकती
आँखों
ने
बताया
मय-कशी
क्या
चीज़
है
हम
लबों
से
कह
न
पाए
उन
से
हाल-ए-दिल
कभी
और
वो
समझे
नहीं
ये
ख़ामोशी
क्या
चीज़
है
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Nida Fazli
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नक़्शा
उठा
के
और
कोई
शहर
देखिए
इस
शहर
में
तो
सब
से
मुलाक़ात
हो
गई
Nida Fazli
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