kacche bakhiye ki tarah rishte udhad jaate hain | कच्चे बख़िये की तरह रिश्ते उधड़ जाते हैं

  - Nida Fazli
कच्चेबख़ियेकीतरहरिश्तेउधड़जातेहैं
लोगमिलतेहैंमगरमिलकेबिछड़जातेहैं
यूँँहुआदूरियाँकमकरनेलगेथेदोनों
रोज़चलनेसेतोरस्तेभीउखड़जातेहैं
छाँवमेंरखकेहीपूजाकरोयेमोमकेबुत
धूपमेंअच्छेभलेनक़्शबिगड़जातेहैं
भीड़सेकटकेबैठाकरोतन्हाईमें
बे-ख़यालीमेंकईशहरउजड़जातेहैं
  - Nida Fazli
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