har ik rastaa andheron men ghira hai | हर इक रस्ता अँधेरों में घिरा है

  - Nida Fazli
हरइकरस्ताअँधेरोंमेंघिराहै
मोहब्बतइकज़रूरीहादिसाहै
गरजतीआँधियाँज़ाएअ'हुईहैं
ज़मींपेटूटकेआँसूगिराहै
निकलआएकिधरमंज़िलकीधुनमें
यहाँतोरास्ताहीरास्ताहै
दु'आकेहाथपत्थरहोगएहैं
ख़ुदाहरज़ेहनमेंटूटापड़ाहै
तुम्हारातजरबाशायदअलगहो
मुझेतोइल्मनेभटकादियाहै
  - Nida Fazli
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