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Neeraj Neer
tum mere vo lagte ho jo koi nain
tum mere vo lagte ho jo koi nain | तुम मेरे वो लगते हो जो कोई नइँ
- Neeraj Neer
तुम
मेरे
वो
लगते
हो
जो
कोई
नइँ
हो
गई
मैं
अमृता
सी
प्यार
में
- Neeraj Neer
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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रात
भर
ता'रीफ़
मैंने
की
तुम्हारे
रूप
की
चाँद
इतना
जल
गया
सुनकर
कि
सूरज
हो
गया
Chandan Rai
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आज
आख़िरी
दफ़ा
था
पानी
से
पेट
भरना
बच्चों
ने
आज
जाके
घर
में
अनाज
देखा
Amaan Pathan
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लगा
आग
पानी
को
दौड़े
है
तू
ये
गर्मी
तेरी
इस
शरारत
के
बाद
Meer Taqi Meer
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हमीं
को
क़ातिल
कहेगी
दुनिया
हमारा
ही
क़त्ल-ए-आम
होगा
हमीं
कुएँ
खोदते
फिरेंगे
हमीं
पे
पानी
हराम
होगा
अगर
यही
ज़ेहनियत
रही
तो
मुझे
ये
डर
है
कि
इस
सदी
में
न
कोई
अब्दुल
हमीद
होगा
न
कोई
अब्दुल
कलाम
होगा
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Meraj Faizabadi
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रोते
बच्चे
पूछ
रहे
हैं
मम्मी
से
कितना
पानी
और
मिलाया
जाएगा
Divy Kamaldhwaj
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जब
भी
आता
है
मिरा
नाम
तिरे
नाम
के
साथ
जाने
क्यूँँ
लोग
मिरे
नाम
से
जल
जाते
हैं
Qateel Shifai
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तमन्ना
है
दिवाली
में
दिया
इक
जल
उठे
ऐसा
जला
दे
फ़ासले
सारे
हमारे
दरमियाँ
जो
हैं
Bhoomi Srivastava
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आँख
में
पानी
रखो,
होंटों
पे
चिंगारी
रखो
ज़िंदा
रहना
है
तो
तरकीबें
बहुत
सारी
रखो
Rahat Indori
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काम
आया
तिरंगा
कफ़न
के
लिए
कोई
क़ुर्बां
हुआ
था
वतन
के
लिए
सोचो
क्या
कर
लिया
तुमने
जी
कर
के
दोस्त
नस
भी
काटी
तो
बस
इक
बदन
के
लिए
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Neeraj Neer
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खेल
ही
तो
है
जहाँ
मैं
उसका
हूँ
ज़िन्दगी
ये
ट्वीट
बदलेगी
कभी
Neeraj Neer
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पूछना
मत
शा'इरी
की
वज्ह
फिर
यार
हम
हारे
हुए
हैं
प्यार
में
Neeraj Neer
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टूटना
देखते
हैं
तारों
का
घर
कहाँ
होगा
बेसहारों
का
हर
किसी
का
कोई
न
कोई
है
सोचकर
देखिए
किनारों
का
आप
तो
देख
भी
नहीं
सकते
नाम
क्या
लेंगे
हम
चमारों
का
पाँव
के
साथ
आँख
पर
छाले
कौन
समझेगा
दुख
कहारों
का
उसने
बाहें
गले
में
डाली
है
क्या
ही
करना
है
इन
बहारों
का
नाक
छिदवा
लिया
है
लड़की
ने
बढ़
गया
काम
अब
सुनारों
का
नीरज
नीर
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Neeraj Neer
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क्या
हुआ
कम
है
गर
ज़िंदगी
की
समझ
सबको
होती
नहीं
शा'इरी
की
समझ
काश
सीने
से
लगकर
के
कहती
मैं
हूँ
मान
लेता
कि
है
ख़ामुशी
की
समझ
तुमने
तो
हाल
भी
मेरा
पूछा
नहीं
उसपे
दावा
तिरा
दोस्ती
की
समझ
वक़्त
अपना
बुरा
चल
रहा
इसलिए
सब
सेे
अच्छी
है
मेरी
घडी
की
समझ
हिज्र
में
वस्ल
की
बात
मत
कर
समझ
राख
में
क़ैद
है
तिशनगी
की
समझ
मैं
कमरबंद
पे
शे'र
कैसे
कहूँ
खा
रही
इश्क़
को
करधनी
की
समझ
इल्म
तो
बाद
में
काम
आया
मिरे
उसको
खोकर
हुई
शा'इरी
की
समझ
एक
लड़की
जो
सोलह
में
ब्याही
गई
पास
उसके
थी
बस
ओढ़नी
की
समझ
-नीरज
नीर
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