phir gham-e-mohabbat ki aakhiri nishaani par | फिर ग़मे-मोहब्बत की आख़िरी निशानी पर

  - Neeraj Neer
फिरग़मे-मोहब्बतकीआख़िरीनिशानीपर
एकशे'रदेखेंआँखोंसेनिकलेपानीपर
इकसिवामोहब्बतकेकुछहोसकामुझसेे
मुझकोयारलानतहैअपनीहीकहानीपर
मेराप्रेमउड़तापंछीमगरमैंइकपिंजरा
दिलनेयोंभीरक्खादरबानपासबानीपर
दुखवोलिखेंहीक्यूँँजिसकोजीनहींसकता
जंगख़ुदसक्यूँँलड़नादिलकीख़ू-फ़िसानीपर
औरतुम्हेंफ़क़तआँखेंचाहतीहैंयेदिलनईं
दिलज़ब्तहोगासीरतकीमेज़बानीपर
'नीर'उसकोखोनेकेबादयेख़्यालआया
इश्क़लिखनावहशतथीऔरवोभीपानीपर
  - Neeraj Neer
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