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Neeraj jha
duniya men mere dukh ko do chaar samajhte hain
duniya men mere dukh ko do chaar samajhte hain | दुनिया में मेरे दुख को दो चार समझते हैं
- Neeraj jha
दुनिया
में
मेरे
दुख
को
दो
चार
समझते
हैं
कहते
हैं
सभी
लेकिन
हाँ
यार
समझते
हैं
आप
अपने
इशारों
से
करते
हैं
बयाँ
जो
भी
बच्चे
नहीं
हैं
हम
सब
सरकार
समझते
हैं
कोई
न
गिला
रक्खा
निस्बत
भी
नहीं
रक्खी
अब
आप
हमें
मतलब
बेकार
समझते
हैं
जिनको
नहीं
हासिल
तू
उनका
ये
तख़य्युल
है
वो
फूल
को
ही
तेरे
रुख़्सार
समझते
- Neeraj jha
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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बस
एक
ही
दोस्त
है
दुनिया
में
अपना
मगर
उस
से
भी
झगड़ा
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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ग़रज़
कि
काट
दिए
ज़िंदगी
के
दिन
ऐ
दोस्त
वो
तेरी
याद
में
हों
या
तुझे
भुलाने
में
Firaq Gorakhpuri
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दोस्ती
और
किसी
ग़रज़
के
लिए
वो
तिजारत
है
दोस्ती
ही
नहीं
Ismail Merathi
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तिरे
लबों
में
मिरे
यार
ज़ाइक़ा
नहीं
है
हज़ार
बोसे
हैं
उन
पर
प
इक
दु'आ
नहीं
है
Pallav Mishra
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वो
हिंदू,
मैं
मुस्लिम,
ये
सिक्ख,
वो
ईसाई
यार
ये
सब
सियासत
है
चलो
इश्क़
करें
Rahat Indori
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यार
भी
राह
की
दीवार
समझते
हैं
मुझे
मैं
समझता
था
मेरे
यार
समझते
हैं
मुझे
Shahid Zaki
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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एक
आवाज़
पे
आ
जाती
है
दौड़ी
दौड़ी
दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान
नहीं
देखती
है
दोस्ती
दोस्ती
होती
है
तुम्हें
इल्म
नहीं
दोस्ती
फ़ाइदा
नुक़सान
नहीं
देखती
है
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Aadil Rasheed
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न
चाहत
से
न
यादों
से
न
वादों
से
न
ख़्वाबों
से
ग़ज़ल
का
कार-ख़ाना
चल
रहा
है
बस
अज़ाबों
से
उदासी
रंग
बन
कर
हर
वरक़
पर
फैल
जाती
है
तेरी
तस्वीर
होती
है
जुदा
जब
भी
क़िताबों
से
सर-ए-शब
आसमाँ
में
दो
सितारे
जैसे
दिखते
हैं
तिरी
आँखें
भी
कुछ
वैसी
ही
दिखती
हैं
हिजाबों
से
चराग़ों
ने
भी
तो
'नीरज'
तवज्जोह
सबकी
खोई
है
परेशाँ
सिर्फ़
रातें
ही
नहीं
हैं
आफ़ताबों
से
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Neeraj jha
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सामने
खड़ा
हूँ
मैं
तू
और
मुझपे
वार
कर
दिल
तेरा
अगर
नहीं
भरा
हो
मुझको
मार
कर
रस्म
ये
तबाह
कर
रही
है
इक
क़बीले
को
मर्द
बन
रहे
हैं
लड़के
लड़कियों
को
मार
कर
प्यार
ही
सबब
बना
है
इस
लटकती
लाश
का
है
अजब
कि
आप
फिर
भी
कह
रहे
हैं
प्यार
कर
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Neeraj jha
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उलझे
हुए
हैं
कब
से
इसी
इक
सवाल
में
आते
हैं
हम
भी
क्या
कभी
तेरे
ख़याल
में
दीवानों
में
से
उसने
किसी
इक
को
जब
चुना
कुछ
मर
गए
थे
रश्क
से
बाक़ी
मलाल
में
सारे
जहाँ
के
गुल
की
है
तासीर
लग
गई
देने
को
तेरी
एक
हँसी
की
मिसाल
में
पहले
तो
टूट
कर
मियाँ
चाहो
किसी
को
तुम
आता
तभी
मज़ा
भी
है
हिज्र-ओ-विसाल
में
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Neeraj jha
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कुछ
नहीं
बदला
है
साहब
आप
के
होते
हुए
एक
बच्चा
मर
गया
फिर
भूख
से
रोते
हुए
मैंने
तो
चाहा
था
बस
पाया
नहीं
था
आपको
फिर
मुझे
क्यूँ
डर
लगा
था
आप
को
खोते
हुए
मुझ
पे
बंदिश
कुछ
ज़ियादा
ही
रही
थी
दोस्तों
इश्क़
भी
करना
था
ज़िम्मेदारियाँ
ढोते
हुए
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Neeraj jha
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क़ैस
जितने
भी
बने
हैं
इश्क़
में
सब
के
सब
मारे
गए
हैं
इश्क़
में
जो
है
मक़तल
पहले
कू-ए-यार
था
क़त्ल
होने
सो
खड़े
हैं
इश्क़
में
फूल
देकर
तुम
रवाना
हो
गई
वरना
बोसे
भी
मिले
हैं
इश्क़
में
ज़ोर
बस
राधा
का
चलता
है
यहाँ
श्याम
तो
हारे
हुए
हैं
इश्क़
में
मय-कदे
हैं
शहर
भर
में
एक
दो
और
लाखों
दिल
जले
हैं
इश्क़
में
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Neeraj jha
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