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Nawaz Deobandi
vo be-vafa hai use be-vafa kahooñ kaise
vo be-vafa hai use be-vafa kahooñ kaise | वो बे-वफ़ा है उसे बे-वफ़ा कहूँ कैसे
- Nawaz Deobandi
वो
बे-वफ़ा
है
उसे
बे-वफ़ा
कहूँ
कैसे
बुरा
ज़रूर
है
लेकिन
बुरा
कहूँ
कैसे
- Nawaz Deobandi
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कभी
न
लौट
के
आया
वो
शख़्स,
कहता
था
ज़रा
सा
हिज्र
है
बस
सरसरी
बिछड़ना
है
Subhan Asad
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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दिल
अभी
पूरी
तरह
टूटा
नहीं
दोस्तों
की
मेहरबानी
चाहिए
Abdul Hamid Adam
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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ख़ुद
चले
आओ
या
बुला
भेजो
रात
अकेले
बसर
नहीं
होती
Aziz Lakhnavi
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उसकी
टीस
नहीं
जाती
है
सारी
उम्र
पहला
धोखा
पहला
धोखा
होता
है
Shariq Kaifi
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लो
फिर
तिरे
लबों
पे
उसी
बे-वफ़ा
का
ज़िक्र
अहमद-'फ़राज़'
तुझ
से
कहा
ना
बहुत
हुआ
Ahmad Faraz
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वो
आ
रहे
हैं,
वो
आते
हैं,
आ
रहे
होंगे
शब-ए-फ़िराक़
ये
कह
कर
गुज़ार
दी
हम
ने
Faiz Ahmad Faiz
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तुम
पूछो
और
मैं
न
बताऊँ
ऐसे
तो
हालात
नहीं
एक
ज़रा
सा
दिल
टूटा
है
और
तो
कोई
बात
नहीं
Qateel Shifai
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वो
पूछते
फिरते
हैं
मेरे
बारे
में
सब
सेे
इक
मेरा
भी
शायर
है
उसे
तुमने
सुना
क्या?
Nawaz Deobandi
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सच्चाई
को
अपनाना
आसान
नहीं
दुनिया
भर
से
झगड़ा
करना
पड़ता
है
Nawaz Deobandi
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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शे'र
तो
रोज़
ही
कहते
हैं
ग़ज़ल
के
लेकिन
आ!
कभी
बैठ
के
तुझ
सेे
करें
बातें
तेरी
Nawaz Deobandi
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देखा
है
बिछड़
कर
के
बिछड़ने
का
असर
भी
मुझ
पर
तो
बहुत
होता
है
उस
पर
नहीं
होता
Nawaz Deobandi
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