ख़ुदकोकितनाछोटाकरनापड़ताहै
बेटेसेसमझौताकरनापड़ताहै
जबऔलादेंनालायकहोजातीहैं
अपनेऊपरग़ुस्साकरनापड़ताहै
सच्चाईकोअपनानाआसाननहीं
दुनियाभरसेझगड़ाकरनापड़ताहै
जबसारेकेसारेहीबेपर्दाहों
ऐसेमेंखु़दपर्दाकरनापड़ताहै
प्यासोंकीबस्तीमेंशोलेभड़काकर
फिरपानीकोमहंगाकरनापड़ताहै
हँसकरअपनेचहरेकीहरसिलवटपर
शीशेकोशर्मिंदाकरनापड़ताहै