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Naviii dar b dar
Unmeed ko imkan mana jaega
उम्मीद को इम्कान माना जाएगा
- Naviii dar b dar
उम्मीद
को
इम्कान
माना
जाएगा
यूँँ
दर्द
को
मेहरान
माना
जाएगा
जब
राह
मंज़िल
की
बहुत
हो
दूर
तो
उस
राह
को
अंजान
माना
जाएगा
ठोकर
को
सीने
से
लगाए
बैठा
हो
तब
हार
को
आसान
माना
जाएगा
इस
इश्क़
में
मुझको
मिला
है
क्या
से
क्या
क्या
प्यार
को
नुक़सान
माना
जाएगा
सैलाब
है
सीने
में
यूँँ
रक्खा
हुआ
ख़ामोशी
को
तूफ़ान
माना
जाएगा
- Naviii dar b dar
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प्रेम
में
निखरा
हुआ
हूँ
आजकल
हर
तरफ़
बिखरा
हुआ
हूँ
आजकल
कोई
जबसे
आया
है
जीवन
में
यूँँ
तब
से
ही
ठहरा
हुआ
हूँ
आजकल
हर
तरफ़
रंगीन
लगता
है
मुझे
बस
यूँँ
ही
गहरा
हुआ
हूँ
आजकल
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जीने
को
भी
दर्द
से
कम
नहीं
ये
ज़िन्दगी
आते
हैं
यहाँ
भी
पल
यूँँ
घुटन
भरे
हुए
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जब
मुकम्मल
नहीं
राह
यूँँ
फिर
सुकूँ
कैसा
है
अब
नहीं
पास
वो
पाने
का
ये
जुनूँ
कैसा
है
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उम्र
होती
नहीं
बाँकपन
के
लिए
कर
गुज़रने
की
ख़्वाहिश
चमन
के
लिए
इक
तिरंगे
में
जो
लौट
के
आए
तो
जाँ
लुटा
देंगे
हम
इस
वतन
के
लिए
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किसकी
आँखों
में
समाए
रहते
हो
इश्क़
की
दुनिया
बसाए
रहते
हो
इक
नज़र
यूँँ
मुस्कुरा
के
देखो
भी
दिल
को
तुम
मेरे
जलाए
रहते
हो
प्यार
हम
सेे
तो
कहाँ
करते
हो
तुम
सारी
दुनिया
को
रिझाए
रहते
हो
आँखों
ही
आँखों
में
कहके
बात
को
हमको
बस
यूँँ
ही
सताए
रहते
हो
दिल
को
भी
यूँँ
हम
तसल्ली
कैसे
दें
आँखों
में
ऐसे
ही
छाए
रहते
हो
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