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Naved sahil
haalat to dekh le mirii main kya se kya hua
haalat to dekh le mirii main kya se kya hua | हालत तो देख ले मिरी मैं क्या से क्या हुआ
- Naved sahil
हालत
तो
देख
ले
मिरी
मैं
क्या
से
क्या
हुआ
फिर
इश्क़
तू
भी
करना
अगर
हौसला
हुआ
जाने
के
बाद
तेरे
मुझे
लोग
देख
कर
कहते
हैं
इसके
साथ
में
कितना
बुरा
हुआ
- Naved sahil
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मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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राब्ता
लाख
सही
क़ाफ़िला-सालार
के
साथ
हम
को
चलना
है
मगर
वक़्त
की
रफ़्तार
के
साथ
Qateel Shifai
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अभी
तो
जाग
रहे
हैं
चराग़
राहों
के
अभी
है
दूर
सहर
थोड़ी
दूर
साथ
चलो
Ahmad Faraz
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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जाँ
हम
दोनों
साथ
में
अच्छे
लगते
हैं
देखो
शे'र
मुकम्मल
अच्छा
लगता
है
Neeraj Neer
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हम
दोनो
मिसरों
से
मिल
कर
के
इक
मतला
हो
पाता
है
इक
दूजे
से
बिछड़ेंगें
तो
बात
अधूरी
रह
जायेगी
Naved sahil
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उस
गुल-बदन
का
क़िस्सा
सुनाती
हैं
तितलियाँ
जैसे
कि
उस
हसीन
की
दासी
हैं
तितलियाँ
वो
आ
के
मेरी
ज़िंदगी
को
यूँॅं
सजा
गई
जैसे
कि
कोई
बाग़
सजाती
हैं
तितलियाँ
मैं
ज़िंदगी
में
अपनी
बुला
लूॅं
उसे
मगर
देखा
है
दश्त
में
कभी
आती
हैं
तितलियाँ
अब
इश्क़
हमको
लग
रहा
है
बोझ
की
तरह
फूलों
ने
बोलकर
ये
उड़ा
दी
हैं
तितलियाँ
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Naved sahil
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उभर
कर
हिज्र
के
ग़म
से
चुनी
है
ज़िंदगी
हमने
वगरना
हम
जहाँ
पर
थे
वहाँ
पर
ख़ुद-कुशी
भी
थी
Naved sahil
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ख़ुदास
बोल
देना
याद
कर
के
वो
बूढ़ा
मर
गया
फ़रियाद
कर
के
ये
पक्षी
और
कोई
बाँध
लेगा
इसे
क्या
फ़ाइदा
आज़ाद
कर
के
गुज़रते
साल
से
ये
पूछना
था
वो
ख़ुश
तो
है
हमें
बर्बाद
कर
के
ख़ुदा
कुछ
वक़्त
मेरी
मौत
टालो
मुझे
मरना
है
सबको
शाद
कर
के
ये
पिछला
साल
था
क़ातिल,
तो
डर
है
नया
मारे
न
फिर
बेदाद
कर
के
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Naved sahil
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गुज़रते
साल
से
ये
पूछना
था
वो
ख़ुश
तो
है
हमें
बर्बाद
कर
के
Naved sahil
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