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Naved sahil
us gul-badan ka qissa sunaati hain titliyan
us gul-badan ka qissa sunaati hain titliyan | उस गुल-बदन का क़िस्सा सुनाती हैं तितलियाँ
- Naved sahil
उस
गुल-बदन
का
क़िस्सा
सुनाती
हैं
तितलियाँ
जैसे
कि
उस
हसीन
की
दासी
हैं
तितलियाँ
वो
आ
के
मेरी
ज़िंदगी
को
यूँॅं
सजा
गई
जैसे
कि
कोई
बाग़
सजाती
हैं
तितलियाँ
मैं
ज़िंदगी
में
अपनी
बुला
लूॅं
उसे
मगर
देखा
है
दश्त
में
कभी
आती
हैं
तितलियाँ
अब
इश्क़
हमको
लग
रहा
है
बोझ
की
तरह
फूलों
ने
बोलकर
ये
उड़ा
दी
हैं
तितलियाँ
- Naved sahil
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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हाए
वो
इश्क़
छुपाने
के
ज़माने
'मोहन'
याद
आता
है
ग़लत
नाम
से
नंबर
रखना
Balmohan Pandey
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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उन
का
जो
फ़र्ज़
है
वो
अहल-ए-सियासत
जानें
मेरा
पैग़ाम
मोहब्बत
है
जहाँ
तक
पहुँचे
Jigar Moradabadi
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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सिर्फ़
ज़िंदा
रहने
को
ज़िंदगी
नहीं
कहते
कुछ
ग़म-ए-मोहब्बत
हो
कुछ
ग़म-ए-जहाँ
यारो
Himayat Ali Shayar
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शहर-वालों
की
मोहब्बत
का
मैं
क़ायल
हूँ
मगर
मैंने
जिस
हाथ
को
चूमा
वही
ख़ंजर
निकला
Ahmad Faraz
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सज
सँवर
के
सामने
जो
तुम
हमारे
आ
गए
यूँँ
लगा
की
इस
ज़मीं
पे
सब
सितारे
आ
गए
कश्ती
मेरी
डूब
कर
भी
इक
नसीहत
दे
गई
उस
नसीहत
के
सहारे
हम
किनारे
आ
गए
नेट
की
दुनिया
में
हम
तो
शा'इरी
ले
आए
थे
वो
अजूबे
हो
गए
जो
तन
उघारे
आ
गए
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Naved sahil
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मौत
आए
न
रब
कहीं
मुझको
नींद
आती
ही
अब
नहीं
मुझको
तुम
भी
इस
मोड़
पे
ले
आई
नछोड़
जाते
है
सब
यहीं
मुझको
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Naved sahil
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ये
फिल्मों
के
कहानीकार
झूठे
हैं
हक़ीक़त
में
तो
हीरो
हार
जाते
हैं
Naved sahil
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अब
कोई
इमामत
के
लिए
ठीक
नहीं
है
इंसाँ
ही
इबादत
के
लिए
ठीक
नहीं
है
इक
शे'र
मोहब्बत
से
ज़रा
हट
के
कहा
तो
वो
शे'र
हुकूमत
के
लिए
ठीक
नहीं
है
ज़िंदा
है
अगर
रहना
तो
चुप
चाप
सहो
ज़ुल्म
ये
दौर
बग़ावत
के
लिए
ठीक
नहीं
है
दुनिया
के
सभी
काम
को
व्यापार
बना
दो
बस
इश्क़
तिजारत
के
लिए
ठीक
नहीं
है
जिस्मों
के
लुटेरों
ने
तवाइफ़
से
कहा
है
ये
काम
रिवायत
के
लिए
ठीक
नहीं
है
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Naved sahil
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पिछले
मोड़
पे
छूट
गई
वो
जिसने
कहा
था
साथ
चलेगी
Naved sahil
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