apne gham ko sar-e-mahfil main uchhaala roya | अपने ग़म को सर-ए-महफ़िल मैं उछाला रोया

  - Naved sahil
अपनेग़मकोसर-ए-महफ़िलमैंउछालारोया
देखकरमुझकोहरइकदेखनेवालारोया
मेरेरोनेकोसभीलोगतमाशासमझे
हालत-ए-हिज्रमेंइसदर्जानिरालारोया
हिज्रउम्मीद-ए-वफ़ाऔरमोहब्बतमेंसे
एकभीरोगकोजिसनेभीहैपालारोया
मुझकोआँखोंसेबहानाथालहूकाक़तरा
इसलिएदेकेमैंग़ालिबकाहवालारोया
इतनामसरूफ़थारोनेमेंकिमैंनेइकदिन
रोनेधोनेसेज़रावक़्तनिकालारोया
  - Naved sahil
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