दफ़अ'तनदिलमेंकिसीयादनेलीअंगड़ाई
इसख़राबेमेंयेदीवारकहाँसेआई
आजखुलनेहीकोथादर्द-ए-मोहब्बतकाभरम
वोतोकहिएकिअचानकहीतिरीयादआई
बसयूँँहीदिलकोतवक़्क़ो'सीहैतुझसेवर्ना
जानताहूँकिमुक़द्दरहैमिरातन्हाई
नश्शा-ए-तल्ख़ी-ए-अय्यामउतरताहीनहीं
तेरीनज़रोंनेगुलाबीतोबहुतछलकाई
यूँँतोहरशख़्सअकेलाहैभरीदुनियामें
फिरभीहरदिलकेमुक़द्दरमेंनहींतन्हाई
डूबतेचाँदपेरोईहैंहज़ारोंआँखें
मैंतोरोयाभीनहींतुमकोहँसीक्यूँँआई
रातभरजागतेरहतेहोभलाक्यूँँ'नासिर'
तुमनेयेदौलत-ए-बेदारकहाँसेपाई