agar shaane pe din ke raat ka parcham nahin hota | अगर शाने पे दिन के रात का परचम नहीं होता

  - Naim Hamid Ali
अगरशानेपेदिनकेरातकापरचमनहींहोता
येआलमकुछभीहोताख़ुशनुमाआलमनहींहोता
किसीसूरतटपकताज़ख़्मदिलकाकमनहींहोता
येज़ख़्म-ए-दिलहैयेमिन्नत-कश-ए-मरहमनहींहोता
मसर्रतसेमसर्रतऔरग़मसेग़मनहींहोता
अजबहोताहैआलमजबकोईआलमनहींहोता
भरोसानाख़ुदापेकरनेवालाडूबजाताहै
पुकारेजोख़ुदाकोग़र्क़-ए-मौज-ए-यमनहींहोता
शहादतपाईहैदिलनेफ़िदा-ए-गुल-रुख़ाँहोकर
शहीदोंकाहमारेदीनमेंमातमनहींहोता
ज़हे-क़िस्मतकिआग़ोश-ए-हरमहैऔरहमवर्ना
गुनाहोंकासिलातोसाग़र-ए-ज़मज़मनहींहोता
'नईम'अपनालियाहैहमनेग़मसारेज़मानेका
किजबहदसेगुज़रजाताहैग़मफिरग़मनहींहोता
  - Naim Hamid Ali
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