ruksat hote suraj ki kirnon ka aanchal thaa | रुख़्सत होते सूरज की किरनों का आँचल था

  - Nahid Qasmi
रुख़्सतहोतेसूरजकीकिरनोंकाआँचलथा
मेंथा
में
मैंभीछतपरजापहुँचीथी
मिरेगिले-शिकवेतोसारेगूँगेबनबैठेथे
औरमेरीकुछकहतीआँखें
बारह-दरीकीचिलमनकेहालोंमेंफॅंसतीथीं
फिरक्यूँँगाँवसेजातेजाते
गलीकेमोड़पेरुकतेरुकते
तुमनेऊपर,मेरीजानिबदेखाथा
औरतुम्हाराउठताहाथज़रासाकाँपगयाथा
औरतुम्हारीरौशनरौशनआँखेंबुझसीगईथीं
दूरउफ़ुक़मेंसूरजडूबगयाथा
  - Nahid Qasmi
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