रुख़्सतहोतेसूरजकीकिरनोंकाआँचलथा
मेंथा
में
मैंभीछतपरजापहुँचीथी
मिरेगिले-शिकवेतोसारेगूँगेबनबैठेथे
औरमेरीकुछकहतीआँखें
बारह-दरीकीचिलमनकेहालोंमेंफॅंसतीथीं
फिरक्यूँँगाँवसेजातेजाते
गलीकेमोड़पेरुकतेरुकते
तुमनेऊपर,मेरीजानिबदेखाथा
औरतुम्हाराउठताहाथज़रासाकाँपगयाथा
औरतुम्हारीरौशनरौशनआँखेंबुझसीगईथीं
दूरउफ़ुक़मेंसूरजडूबगयाथा