hawa ki halki si aahat pe yuñ machal j | हवा की हल्की सी आहट पे यूँँ मचल जाना

  - Naheed Kausar
हवाकीहल्कीसीआहटपेयूँँमचलजाना
उमीद-ए-वस्लपेबिस्मिलकाफिरसँभलजाना
रहेथेआनाथाऔरइम्काँथा
येज़ोम-ए-दिलथायाक़िस्मतकायूँँबदलजाना
येदिलपेबोझहैदर्दोंकायातिरीयादें
याआबलोंकाहरारतसेहैपिघलजाना
तिरीतलाशमेंउठउठकेपागलोंकीतरह
शब-ए-फ़िराक़मेंघरसेकहींनिकलजाना
येजानतेहैंकिमुमकिननहींतूलौटआए
शिआर-ए-दिलहैतिरीयादसेबहलजाना
तिरीउमीदकाजबसरसेउठगयाआँचल
तोफ़स्ल-ए-गुलमेंथायकसरख़िज़ाँमेंढलजाना
अभीथीतेरेसफ़ीनेकीमुंतज़िर'कौसर'
अजबलगातिरेसाहिलसेयूँँफिसलजाना
  - Naheed Kausar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy