KHvaabon ke mahal toot ke gir jaate hain akshar | ख़्वाबों के महल टूट के गिर जाते हैं अक्सर

  - Naheed Kausar
ख़्वाबोंकेमहलटूटकेगिरजातेहैंअक्सर
फिरउनसेहीदिनअपनेसँवरजातेहैंअक्सर
बाद-ए-सबाउनकोयेपैग़ाममिरादे
क्यूँँछुपकेमिरीरहसेगुज़रजातेहैंअक्सर
दुनियामेंहरइकशयहैफ़क़ततेरीकमीहै
नक़्शेतिरीयादोंकेउभरजातेहैंअक्सर
वोनाज़उठानेकेतोक़ाएलहीनहींहैं
फिरहमभीख़फ़ाहोकेबिफरजातेहैंअक्सर
'कौसर'तिरेमय-ख़ानेमेंसाग़रसुबूहै
फिरक्यूँँयहाँमय-नोशठहरजातेहैंअक्सर
  - Naheed Kausar
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