na jaane kab ki dabii talkhiyaan nikal aayein | न जाने कब की दबी तल्ख़ियाँ निकल आईं

  - Nafas Ambalvi
जानेकबकीदबीतल्ख़ियाँनिकलआईं
ज़रासीबातथीऔरबर्छियाँनिकलआईं
हुआयेहमपेअँधेरोंकीसाज़िशोंकाअसर
हमारेज़ेहनमेंभीखिड़कियाँनिकलआईं
मुझेनवाज़दीमौलानेफूलसीबेटी
मिरेहिसाबमेंकुछनेकियाँनिकलआईं
वोपेड़जिसपेक़ज़ाबनकेबिजलियाँटूटीं
सुनाहैउसपेहरीपत्तियाँनिकलआईं
बदलतीरुतमेंयेकम-ज़र्फ़ियोंकाआलमहै
बिलोंसेपँखलिएच्यूँँंटियाँनिकलआईं
ख़ुदाकेवास्तेअबतोसफ़रतमामकरो
किअबक़फ़ससेभीतोउँगलियाँनिकलआईं
येमो'जिज़ाहीतोहै'नफ़स'कितूफ़ाँमें
समुंदरोंसेसभीकश्तियाँनिकलआईं
  - Nafas Ambalvi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy