kuchh aisa ho gaya hai yaar apna | कुछ ऐसा हो गया है यार अपना

  - Naeem Raza Bhatti
कुछऐसाहोगयाहैयारअपना
गिलाबनताहैअबबेकारअपना
पस-ए-पर्दाबहुतबे-पर्दगीहै
बहुतबेज़ारहैकिरदारअपना
ख़राबेमेंकिसेअपनीख़बरहै
अगरचेकरलियाइंकारअपना
दर-ओ-दीवारसेझड़तीहैहैरत
कहाँलेजाऊँमैंआज़ारअपना
वफ़ूर-ए-नश्शा-ए-लग़्ज़िशकेबाइस
हुआहैरास्ताहमवारअपना
पतिंगेघेरलाताहूँकहींसे
दिएकीलौसेजोहैप्यारअपना
'रज़ा'येफूलहोनेकीतमन्ना
किसीकीसाँसपरहैबारअपना
  - Naeem Raza Bhatti
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