gard-o-ghubaar yuñ badha chehra bikhar gaya | गर्द-ओ-ग़ुबार यूँँ बढ़ा चेहरा बिखर गया

  - Nadeem Mahir
गर्द-ओ-ग़ुबारयूँँबढ़ाचेहराबिखरगया
मल्बूसथामैंजिसमेंलबादाबिखरगया
कलरातजुगनुओंकीसमुंदरपेभीड़थी
लगताथारौशनीकाजज़ीराबिखरगया
दहशतथीइसक़दरकिमनाज़िरपिघलगए
गिरकरबदनसेख़ुदमिरासायाबिखरगया
मंज़रमेंऔरनज़रमेंतसादुमथारातभर
जबभीउठीनिगाहेंदरीचाबिखरगया
जाँसेज़्यादारक्खाजिसेएहतियातसे
विर्सेमेंजोमिलाथावोतोहफ़ाबिखरगया
तूफ़ान-ए-याद-ए-रफ़्तगाँइतनाशदीदथा
अश्कोंसेमेरीआँखकाताराबिखरगया
  - Nadeem Mahir
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