aap ko mujh se KHafaa mujh se KHafaa dekhta hooñ | आप को मुझ से ख़फ़ा मुझ से ख़फ़ा देखता हूँ

  - Nadeem Fazli
आपकोमुझसेख़फ़ामुझसेख़फ़ादेखताहूँ
फूटतीक्यूँँनहींआँखेंमिरीक्यादेखताहूँ
रोज़इसरूहकीवीरानियाँखिलउठतीहैं
रोज़इसदश्तमेंइकआबला-पादेखताहूँ
गुलखिलातेहैंनयारोज़येरिश्ते-नाते
रोज़हीख़ूनकाइकरंगनयादेखताहूँ
एकसचयेहैजोदुनियाकोबरतनेपेखुला
एकसचवोजोकिताबोंमेंलिखादेखताहूँ
आपहैंसबसेजोअज़-राह-ए-ज़रूरतहीमिले
औरमैंआपमेंभीख़ू-ए-वफ़ादेखताहूँ
आँखभरकरमैंजिसेदेखपायाथा'नदीम'
ख़ुदकोउसख़्वाबकेमलबेमेंदबादेखताहूँ
  - Nadeem Fazli
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