kisko roshan banaa rahe ho tum | किसको रोशन बना रहे हो तुम

  - Muzdum Khan
किसकोरोशनबनारहेहोतुम
इतनाजोबुझतेजारहेहोतुम
फूलकिसनेक़बूलकरनेहैं
जबतलकमुस्कुरारहेहोतुम
लोगपागलबनायेजाचुकेहैं
अबनयाक्याबनारहेहोतुम
गाँवकीझाड़ियाँबतारहींहैं
शह्रमेंगुलखिलारहेहोतुम
औरकिसनेतुम्हेंनहींदेखा
औरकिसकेख़ुदारहेहोतुम
  - Muzdum Khan
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