mujhe har zakham vo achchhe lage hain | मुझे हर ज़ख़्म वो अच्छे लगे हैं

  - Muzammil Raza
मुझेहरज़ख़्मवोअच्छेलगेहैं
तिरीजानिबसेजोमुझपेलगेहैं
वोमेरेघरभलाआएभीकैसे
मिरेदरवाज़ेपेतालेलगेहैं
किसीनेदिलहमारातोड़डाला
तभीतोहमग़ज़लकहनेलगेहैं
गिनूँमैंहिज्रकीरातोंकोकैसे
येकुछदिनसालकेजैसेलगेहैं
नएकुछज़ख़्मदेदोफिरसेमुझको
पुरानेज़ख़्मअबभरनेलगेहैं
उसेकैसेमैंफिरसेयादकरलूँ
भुलानेमेंजिसेअर्सेलगेहैं
  - Muzammil Raza
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