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Murli Dhakad
khaak hua to vujood phir se miTTi ke saath baandha gaya
khaak hua to vujood phir se miTTi ke saath baandha gaya | ख़ाक हुआ तो वजूद फिर से मिट्टी के साथ बाँधा गया
- Murli Dhakad
ख़ाक
हुआ
तो
वजूद
फिर
से
मिट्टी
के
साथ
बाँधा
गया
मैं
वो
बदनसीब
पत्थर
था
जो
चिट्ठी
के
साथ
बाँधा
गया
- Murli Dhakad
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जाँ
हम
दोनों
साथ
में
अच्छे
लगते
हैं
देखो
शे'र
मुकम्मल
अच्छा
लगता
है
Neeraj Neer
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किसी
ने
ख़्वाब
में
आकर
मुझे
ये
हुक्म
दिया
तुम
अपने
अश्क
भी
भेजा
करो
दु'आओं
के
साथ
Afzal Khan
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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धूप
भी
आराम
करती
थी
जहाँ
अपना
ऐसी
छाँव
से
नाता
रहा
Madan Mohan Danish
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
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ये
कैसा
तजुर्बा
है
कि
दिल
जलाने
पे
अक्सर
अँधेरा
छा
जाता
है
रोशनी
नहीं
होती
Murli Dhakad
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हम
सबको
इसी
हैरत
में
मर
जाना
है
कि
मरके
फिर
किधर
जाना
है
अच्छा
हो
गर
हो
बैचेनी
का
कोई
सबब
ये
क्या
कि
पता
ही
नहीं
क्या
पाना
है
मेरे
पास
रखे
हैं
बहुत
से
काग़ज़
के
फूल
क्या
तुम्हारी
नजर
में
कोई
बुतखाना
है
एक
तो
गिला
न
कर
सका
बारिशों
का
और
उस
पर
शौक
तो
ये
है
कि
नहाना
है
क्या
कभी
शाम
की
आँखों
में
तुमने
डूबते
सूरज
के
दर्द
को
पहचाना
है
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Murli Dhakad
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बताता
हूँ
राह
राहगीरों
को
अब
राह
में
ही
कहीं
खो
गया
हूँ
मैं
मेरे
हाथ
पे
किसी
ने
गुलाब
क्या
रखा
ख़ुशबू
ख़ुशबू
हो
गया
हूँ
मैं
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Murli Dhakad
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और
कोई
ग़म
न
था
क्या
जमाने
में
दिल
दहल
उठा
है
आधे
ही
पैमाने
में
कोई
जन्नत
का
नाम
न
ले
लेना
ख़ुदा
के
साथ
खड़ा
हूँ
वीराने
में
और
भी
हैं
साक़ी
के
तलबगार
और
भी
लोग
हैं
मय-ख़ाने
में
तुम
मुझ
सेे
मेरा
हासिल
पुछते
हो
उम्र
गुज़री
है
तुमको
रिझाने
में
तुम
सीरत
में
मुझ
सेे
जुदा
हो
लेकिन
है
तुम्हारा
दर्द
भी
मेरे
अफ़साने
में
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Murli Dhakad
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दुनिया
का
तो
पता
नहीं
आदमी
एक
बहाना
है
Murli Dhakad
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