masarraton ke khazaane hi kam nikalte hain | मसर्रतों के ख़ज़ाने ही कम निकलते हैं

  - Munawwar Rana
मसर्रतोंकेख़ज़ानेहीकमनिकलतेहैं
किसीभीसीनेकोखोलोतोग़मनिकलतेहैं
हमारेजिस्मकेअंदरकीझीलसूखगई
इसीलिएतोअबआँसूभीकमनिकलतेहैं
येकर्बलाकीज़मींहैइसेसलामकरो
यहाँज़मीनसेपत्थरभीनमनिकलतेहैं
यहीहैज़िदतोहथेलीपेअपनीजानलिए
अमीर-ए-शहरसकहदोकिहमनिकलतेहैं
कहाँहरएककोमिलतेहैंचाहनेवाले
नसीबवालोंकेगेसूमेंख़मनिकलतेहैं
जहाँसेहमकोगुज़रनेमेंशर्मआतीहै
उसीगलीसेकईमोहतरमनिकलतेहैं
तुम्हीबताओकिमैंखिलखिलाकेकैसेहँसूँ
किरोज़ख़ाना-ए-दिलसेअलमनिकलतेहैं
तुम्हारेअहद-ए-हुकूमतकासानेहायेहै
किअबतोलोगघरोंसेभीकमनिकलतेहैं
  - Munawwar Rana
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy