kisi gareeb ki barson ki aarzoo ho jaaun | किसी ग़रीब की बरसों की आरज़ू हो जाऊँ

  - Munawwar Rana
किसीग़रीबकीबरसोंकीआरज़ूहोजाऊँ
मैंइससुरंगसेनिकलूँतूआब-जूहोजाऊँ
बड़ाहसीनतक़द्दुसहैउसकेचेहरेपर
मैंउसकीआँखोंमेंझाँकूँतोबा-वज़ूहोजाऊँ
मुझेपतातोचलेमुझमेंऐबहैंक्याक्या
वोआइनाहैतोमैंउसकेरू-ब-रूहोजाऊँ
किसीतरहभीयेवीरानियाँहोंख़त्ममिरी
शराब-ख़ानेकेअंदरकीहाव-हूजाऊँ
मिरीहथेलीपेहोंटोंसेऐसीमोहरलगा
किउम्र-भरकेलिएमैंभीसुर्ख़-रूहोजाऊँ
कमीज़रासीभीमुझमेंकोईरहजाए
अगरमैंज़ख़्मकीसूरतहूँतोरफ़ूहोजाऊँ
नएमिज़ाजकेशहरोंमेंजीनहींलगता
पुरानेवक़्तोंकाफिरसेमैंलखनऊहोजाऊँ
  - Munawwar Rana
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