तुम समझते हो कि मैं सिर्फ़ ज़ुबाँ खोलूँगा

  - Mumtaz Gurmani
तुमसमझतेहोकिमैंसिर्फ़ज़ुबाँखोलूँगा
बातबाज़ारमेंरखदूँगादुकाँखोलूँगा
फिरतेरीज़ातपेअंगुश्त-नुमाईहोगी
जबमैंलोगोंपेकोईऔरजहाँखोलूँगा
आजकुछशहरकेबूढोंसेमिलूँगाजाकर
आजमुद्दतसेपड़ेबंदमकाँखोलूँगा
देखनातुंदहवाओंकातज़बज़ुबजबमैं
बादबानोंकोसर-ए-आब-ए-रवाँखोलूँगा
मुझपेतूखोलबिछड़नेकेफ़वाइदसारे
तुझपेमैंहिज्रकेसबसूद-ओ-ज़ियाँखोलूँगा
तूहीइकशख़्सहैक़िस्सेमेंअलावामेरे
तुझसेभीराज़छुपायातोकहाँखोलूँगा
  - Mumtaz Gurmani
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